Friday, June 30, 2017

टूटना

टूटकर चाहा था तुमने 
सभी रिश्तों
उनसे जुड़ी संवेदनाओं 
और उपजते प्रश्नचिन्हों
को ताक पे रखकर ...
सबसे परे 
सिर्फ एक रिश्ता था 
हमारा अपना 
जिसमें अच्छा बुरा 
सही ग़लत
हम तै करते थे 
उसी सच को सर्वस्व मान 
पूरी ज़िन्दगी गुज़ार दी हमने 
आज जब तुम नहीं हो
तो तुम्हारे इस टूटकर चाहने ने 
पूरी तरह से 
तोड़ दिया है मुझे ....!!!

सरस

8 comments:

  1. ओह...उसी को संबल बना कर जीना होगा ...प्रभावी पंक्तियाँ

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  2. यादें ... जब लगता है, हम टूट गए - तब कोई सिरा जुड़ता है धीरे से

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  3. बेहतरीन पंक्तियाँ ...

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  4. आपकी लिखी रचना  "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 2 अगस्त 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. वाह!!!
    बहुत सुन्दर...

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  6. बहुत सुन्दर ! भावनाओं का सही तालमेल शब्दों के साथ आभार ''एकलव्य"

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  7. tutan ubrane nhi deti kbhi kbhi ..aur kbhi ..

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  8. tutan ubrane nhi deti kbhi kbhi ..aur kbhi ..

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